Wednesday, December 28, 2011

शून्यता: इन्ग्रिद अर्विद्सन

इन्ग्रिद अर्विद्सन की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

संसार में कितनी जगह लेता है इंसान
जंगल में एक वृक्ष जितनी जगह लेता है शायद उससे भी कम
पर इतना विशाल शून्य पीछे छोड़ जाता है
एक पूरी दुनिया मिलकर नहीं भर सकती

इंसान का दिल कितना छोटा है
एक पक्षी से ज्यादा बड़ा नहीं
पर अन्दर समाहित किये हुए पूरी दुनिया
और वहाँ व्याप्त शून्य... दुनिया से भी बड़ा
जैसे अंतहीन खाली जगहों में गूंजता जंगल का मौन संगीत.


Saknad

Så liten plats en människa tar på jorden.
Mindre än ett träd i skogen.
Så stort tomrum hon lämnar efter sig.
En hel värld kan inte fylla det.
Så litet en människa hjärta är.
Inte större än en fågel.
Rymmer ändå hela världen
och tomma rymder större än hela världen
ändlösa tomma rymdskogar av tystnad sång.

-Ingrid Arvidsson

4 comments:

  1. इंसान का दिल कितना छोटा है
    एक पक्षी से ज्यादा बड़ा नहीं
    सुन्दर भाव लिये,अति सुन्दर कविता
    नव वर्ष की शुभकामनायें
    vikram7: आ,मृग-जल से प्यास बुझा लें.....

    ReplyDelete
  2. बहुत बेहतरीन और प्रशंसनीय.......
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

    ReplyDelete
  3. //पर इतना विशाल शून्य पीछे छोड़ जाता है
    एक पूरी दुनिया मिलकर नहीं भर सकती

    //पर अन्दर समाहित किये हुए पूरी दुनिया
    और वहाँ व्याप्त शून्य... दुनिया से भी बड़ा

    behtareen.. :)

    ReplyDelete
  4. सारगर्भित और बहुत बड़ी लगी यह छोटी सी सुंदर कविता .प्रस्तुति के लिए आभार

    ReplyDelete