Tuesday, October 10, 2017

जीवन के बारे में : मायिकेन योहानसन


मायिकेन योहानसन  की  एक कविता
(अनुवाद : अनुपमा पाठक )

परपीड़क करते हैं इंतज़ार
लेकिन
भयभीत लोग कहते है...
मैं नहीं मर सकता, मैं मरना नहीं चाहता !

और वह सोचता है, चमत्कृत होता है:
मृत्यु यूँ होनी चाहिए
कि मृत्यु स्वयं मृत्य को प्राप्त हो जाए...

और वह कहता है :
मैंने एक शहर के बारे में सुन रखा है
बादलों के पार है वह शहर
हालाँकि अब तो वह कहलाता है
नगर पालिका
बादलों के ऊपर स्थित...
सोचता है वह --कि, क्या वो शहर सच में होगा मौजूद
जब मैं मृत्य को ही मार डालूँगा?

Om livet

"Träfracken väntar"
Men
säger den ängslige -
jag vill inte dö!

Och han undrar:
Döden måste vara att
döden dö...

Och han säger:
Jag har hört om en stad
ovan molnen
fast nu heter det
en kommun
ovan molnen...
Undrar om den finns
när jag ska döden dö?

--Majken Johansson

Saturday, July 1, 2017

प्रकाशमय ग्रीष्म : वेरनेर वोन हेदेंस्तम

वेरनेर वोन हेदेंस्तम की एक कविता 
(अनुवाद :अनुपमा पाठक) 

हे अनुपम ग्रीष्म !
तुम अपनी रौशनी से मुझे सराबोर कर देते हो
मुलायम से पथ पर चलता हूँ मैं
जंगली गुलाबों की भीड़ के बीच तुम मेरा एक ठौर कर देते हो

यहाँ चमकती हुई झील तीव्रता से
शाखाओं को प्रतिविम्बित करती हुई कहीं गहरे उतरती है
और बकरियां ऊँची चट्टानों पर
चुपचाप अँधेरे में विचरती हैं

हर एक कोना हर एक झाड़ी दिव्य प्रकाशित
ये सज्जा तो तुम्हारी पहचान है न ग्रीष्म
तुम से ही मैं आया हूँ, तुम तक ही मुझे जाना है
तुम्हारे दिए हुए खुशियों के पंख से ही, हे ग्रीष्म !



Sommarljuset


Du underbara sommardag,
som med ditt ljus mig fyller!
Den mjuka stigen vandrar jag
bland vilda rosors myller.

Här glimmar sjön i branta djup
och speglar häll och grenar,
och getter högt på bergets stup
gå tyst bland mörka enar.

Bestråla, ljus, de minsta snår,
som dina marker smycka!
Från dig jag kom, mot dig jag går,
bevingad av din lycka.

--Verner von Heidenstam

Sunday, August 16, 2015

जीवन की आपा-धापी में : नील्स फर्लिन

नील्स फर्लिन की एक कविता 
(अनुवाद अनुपमा पाठक) 

जीवन की आपा-धापी में
हम जाते हैं अलग अलग स्थानों तक
हम मिलते हैं और अदा करते हैं
अपने अपने किरदार -

हम अपने विचारों को छुपाते हैं,
छुपाते हैं अपने घाव
और अपना हृदय जो धड़कता है
और करता है आघात -

हम हर सुबह टांग कर दरवाज़े की खूंटियों पर
अपने नाम का विज्ञापन
बात करते हैं मौसम
और पवन के बारे में -

जीवन की आपा-धापी में
हम कितने करीब आ जाते हैं
लेकिन फिर भी होते हैं बहुत दूर
वैसे भी.


I livets villervalla

I livets villervalla
vi gå på skilda håll.
Vi mötas och vi spela
vår roll -

Vi dölja våra tankar,
Vi dölja våra sår
och vårt hjärta som bankar
och slår -

Vi haka våra skyltar
var morgon på vår grind
och prata om väder
och vind -

I livets villervalla
så nära vi gå
men så fjärran från varandra
ändå.

-Nils Ferlin

Saturday, August 15, 2015

इंसान: गुन्नर ब्योर्लिंग

गुन्नर ब्योर्लिंग  की  एक कविता
(अनुवाद : अनुपमा पाठक )

इंसान
जिनके साथ संवाद हो सके
जिनके साथ लड़ा जा सके
जिन्हें निहारा जा सके और जिनके साथ हुआ जा सके
जिनसे खुशियाँ बांटी जा सकें
जिनपर भरोसा किया जा सके
जिनकी राह देखी जाए या
जिन्हें याद किया जाये
और जिनसे प्रेम किया जा सके

Att människa

Att människa
att tala med
att strida med
att se och vara med
att glädjas
och att lita med
att längta eller
sakna
o att älska

--Gunnar Björling

Tuesday, August 4, 2015

प्रेम कविता: के - जी हिल्देब्रंद

के - जी हिल्देब्रंद  की  एक  कविता
(अनुवाद : अनुपमा पाठक )

बूढ़े, दो पेड़
अत्यंत गोपनीयता के साथ बातचीत में लीन.
पतझड़ और बसंत
विस्मृत वलयों  में.
पर्ण समूह भींगते हुए
एक ही बारिश के पानी में.

स्वतः स्पष्ट होना किसी के लिए.
ग्रहण करना जल एक ही स्रोत से.
कोई दिखावा शेष नहीं, न ही कोई झूठ.

बूढ़े, दो पेड़
शाश्वत... अपरिवर्तनशील...
एक दूजे के प्रति समर्पित.


Kärleksdikt

Som två gamla träd
förtroligt samtalande med varandra.
Höstar och vårar
kvarglömda i årsringarna.
Lövverken våta
av samma regnvatten.

Att vara självklar för någon.
Att dricka ur sämma källa.
Ingen förställning kvar, ingen osanning.

Två gamla träd
oföränderligt
sträckta mot varandra.

- K-G Hildebrand

अंत्यपदी: जैक्स वैरूप

जैक्स वैरूप की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

मैं तुमसे गुज़र चुका हूँ.
मैं तुम्हें कभी नहीं खो सकता.

Envoi

Jag har varit med om dig.
Jag kan aldrig förlora dig.

- Jacques Werup

तुष्ट: लुकास मूडीसन

लुकास मूडीसन की एक कविता 
(अनुवाद : अनुपमा पाठक )

मैं समाहित किये हूँ अपने भीतर महान रहस्य
एक महान ख़ुशी
एक महान प्रेम

वह ख़ुशी
वह प्रेम
मेरे वजूद से बहुत बड़े हैं
इस संसार की तुलना में बहुत बड़े हैं
उस दर्द से बहुत बड़े हैं
जो महसूस करती होंगी नुकीली कीलें
खींचते हुए किसी भारी भरकम ढेर को

जितना आप सोच सकते हैं उसकी तुलना में बेहद वृहद्

ये वह असीम सुख है
जिसके साथ मैं बड़ा हुआ
दौड़ा भागा

मेरे भीतर एक सागर है जो नहीं

... शेष होता कभी.


Lycklig

Jag rymmer en stor hemlighet
en stor lycka
en stor kärlek

Denna lycka
denna kärlek
är större än jag
är större än världen
är större än smärtan
av spikar som slås genom händer
pålar som drivs genom bröstkorgar

större än vad du vill

Det är ur denna gränlösa lycka
jag vuxit
sprungit

Den är ett hav inuti mig som aldrig

... tar slut.

--Lukas Moodysson