Monday, August 6, 2012

सर्वोत्तम: कारिन बुवेए

कारिन बुवेए की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)


हमारे पास जो सर्वोत्तम है,
उसे दिया नहीं जा सकता,
उसे कहा नहीं जा सकता,
और न ही उसे लिखा जा सकता है.

आपके मन की सर्वोत्तम बात
अपवित्र नहीं की जा सकती.
वह चमकती है गहरे वहां भीतर
आपके लिए और केवल ईश्वर के लिए.

यह हमारी समृद्धता का ताज है
कि जिस तक कोई और नहीं पहुँच सकता.
यह हमारी विपन्नता का दर्द है
कि जो किसी और को नहीं मिल सकता.

Det Bästa

Det bästa som vi äga,
det kan man inte giva,
det kan man inte säga
och inte heller skriva.

Det bästa i ditt sinne
kan intet förorena.
Det lyser djupt där inne
för dig och Gud allena.

Det är vår rik doms råga
att ingen ann kan nå det.
Det är vårt armods plåga
att ingen ann kan få det.

-Karin Boye

Tuesday, July 31, 2012

इस तरह: योरान ग्रेइदर

योरान ग्रेइदर की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)


इस तरह जीवित रहता हूँ मैं
सौंपे गए अनुभवों
के आधार पर,
स्वयं अपने, या औरों के,
इससे कोई विशेष
अंतर नहीं पड़ता.



Så lever jag, genom
erfarenheterna jag
anförtros,
mina egna, andras,
det spelar ingen
större roll.

-Göran Greider

Friday, July 20, 2012

जो चल रहा है अभी: स्तिग योहानसन

स्तिग योहानसन की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक) 


पंछी गाते हैं और उन्हें प्रत्युत्तर मिलता है
जलाशय के दूसरे पार से.
कभी कभी मुझे लगता है कि यह बात सुन्दर है.

और इसी बीच जब मैं खड़ा होता हूँ और सुनता हूँ
और देखता हूँ सनौबर के पेड़ों द्वारा वन बनने की खातिर
                                                           किये गए यत्न को
तब स्थानांतरित हो जाता हूँ मैं अतीत के करीब.

घट जाता है कालापन
आकाश नहीं रह जाता है पहले जैसा.
फिर भी यह एक बिलकुल सामान्य सा दिन है
और न ही कोई ख़ास समय वर्ष का.

Det som för närvarande pågår

Fåglar sjunger och får svar
från andra sidan bäcken.
Ibland tycker jag det är vackert.

Och medan jag står och lyssnar
och ser björkarnas strävan
                            efter att bli skog
flyttas jag närmare det förflutna.

Svärtan avtar
Himlen är inte längre densamma.
Ändå är det en helt vanlig dag
och ingen särskild årstid.

-Stig Johansson

Thursday, July 19, 2012

स्वतंत्र: योरान ग्रेइदर

योरान ग्रेइदर की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)


उन्हें लगता है कि मैं समकालीन हूँ
कि मेरी तलाश है "राजनीतिक".

बेशक ऐसा नहीं है:
यह दर्द है कई हज़ार वर्ष पुराना.
और कविता है मात्र पगडंडियों का जालक्रम
सौंपी गयी उन्हें जो हैं उसके प्रति उदासीन.

तो आज मुझे क्या लिखना चाहिए?
स्वतंत्रता करती है अभिभूत मुझे हमेशा.


Fri

De tror nog att jag är samtida
att jag letar efter det "politiska".

Så är det naturligtvis inte:
Den här smärtan är flera tusen år gammal.
Och poesin är bara ett nät av stigar
kastat över det likgiltiga.

Så vad ska jag skriva idag?
Friheten överväldigar mig alltid.

-Göran Greider

Wednesday, July 18, 2012

प्रमाण: ब्रुनो के. ओइयर

ब्रुनो के. ओइयर की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)


आँतों में खाद्य
वह दैनिक जुगाली
मौसम, समाज एवं अन्य बीमारियाँ के विषय में
सबने पैठ जमा ली है हमारे जीन में
और रोक रखा है सत्य को सामने आने से
जैसे कि इंसान ने अंततः आधी सदी के बाद
ढूंढ़ निकाला हो उस लापता विमान को
जो स्थिर खड़ा था गगन में
बारिश बर्फ और ओलों से जंग खाया हुआ
पंखों के आसपास उगे हुए थे जाले
यात्रा के सामान और कपड़े बिखरे पड़े थे बादलों की तरह

Bevis

inälvsmaten
det dagliga tuggandet
om vädret samhället och andra sjukdomar
har satt seg i våra gener
och hindrat sanningen att komma fram
som att man äntligen efter ett halvt sekel
hittat det försvunna flygplanet
det stod stilla i himlen
rostigt av regn snö och hagel
kring vingarna växte spindelväv
resväskor och kläder låg utspridda som moln

-Bruno K. Öijer

Tuesday, July 17, 2012

आवश्यकता: योरान ग्रेइदर

योरान ग्रेइदर की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)


एक निश्चिंत दिन -
धूप में गया बिना किसी योजना के,
कुछ लोगों से मिला
जिन्होंने बनाया मुझे स्नेही,
प्रेम से परिपूर्ण, स्नेह से परिपूर्ण.
  
Behöva

En sörglös dag -
Drev i solen utan plan,
mötte några människor
som gjorde mig kärleksfull,
kärleksfull, kärleksfull.

-Göran Greider

Monday, July 16, 2012

कीचड़दार मौसम: योरान ग्रेइदर

योरान ग्रेइदर की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)


थोड़ा सकारात्मक हूँ मैं कीचड़दार मौसम के प्रति.
एक साधारण मौसम,
सबसे अधिक यथार्थवादी.

लोगों को वापस मिल जाती है उनकी सजातीयता.


Slaskväder

Litet svag är jag allt för slaskvädret.
Det anspråkslösa vädret,
det mest realistiska.

Folk får tillbaka sina anletsdrag.

-Göran Greider

Sunday, July 15, 2012

तुम और मैं और दुनिया: वर्नर अस्पेंसट्रोम

वर्नर अस्पेंसट्रोम की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

मत पूछो तुम कौन हो और मैं कौन हूँ
और क्यूँ हैं सब चीज़ें.
प्रोफेसरों को करने दो अनुसन्धान,
उन्हें दी जाती है तनख्वाह.
रख दो तराजू मेज़ पर
और स्वयं को तौलने दो वास्तविकता को.
पहन लो अपनी कोट.
कक्ष की रोशनी बुझा दो.
दरवाजा बंद करो.
करने दो मृतकों को शव-संलेपन मृतकों का.

यहाँ से बढ़ते हैं हम आगे .
वह जिसके पास सफ़ेद रबड़ के जूते हैं
तुम हो.
वह जिसके पास काले रबड़ के जूते हैं
मैं हूँ.
और बारिश जो हम दोनों पर बरस रही है
बारिश है.


Du och jag och världen

Fråga inte vem du är och vem jag är
och varför allting är.
Låt professorerna utreda,
de har betalt.
Ställ hushållsvågen på bordet
och låt verkligheten väga sig själv.
Sätt på dig kappan.
Släck ljuset i tamburen.
Stäng dörren.
Låt de döda balsamera de döda.

Här går vi nu.
Den som har de vita gummistövlarna
är du.
Den som har de svarta gummistövlarna
är jag.
Och regnet som faller över oss båda
är regnet.

-Werner Aspenström

Saturday, July 14, 2012

सूर्यास्त से पहले: वर्नर अस्पेंसट्रोम

वर्नर अस्पेंसट्रोम की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

सूर्यास्त से ठीक पहले स्पंदित होते हैं पेड़,
हवा से नहीं, बल्कि एक दूसरे के प्रति प्रेम के वशीभूत हो.
रॉबिन पक्षी गाते हैं गीत की मृत्यु को.
कोई नहीं जानता कितने लम्बे समय तक रहती है रात.

 Före solnedgången

Strax före solnedgången skälver träden,
inte av vind, men av kärlek till varandra.
Trastarna sjunger sångens död.
ingen vet hur länge natten varar.

-Werner Aspenström

Friday, July 13, 2012

जीना: योरान ग्रेइदर

योरान ग्रेइदर की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)


जिस समय में मैं रहता था उससे लगभग गायब हो गया.

उनके मध्य हो गया शामिल,
महसूस हुआ मस्तिष्क का तीव्रता से फटना.

जैसा कि होता है बड़ी व्याधि के पहले.

 Leva

Försvann nästan i tiderna jag levde i.

Gick mitt i dem,
kände huvudet blixtra blixtra.

Som före en stor sjukdom.

-Göran Greider

Thursday, July 12, 2012

मैं 'मौन' हूँ: एल्सा ग्रावे

एल्सा ग्रावे की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)


मैं मौन हूँ
उस मीन का जो तैरती है
गहरे में समुद्री फूलों के मार्ग पर
समुद्री शैवाल कुञ्जों के बीच से.

मैं चुप्पी हूँ अंडे की
जिसमें बढ़ता है पक्षी
नीले कवच के तहत
और रक्त के घूमते जालक्रम में.
मैं वह मौन हूँ
जो मूक फूल महसूसते हैं
जब पेड़ गाते हैं अपने तूफानों का गीत,
मैं वो हूँ जो है स्थित
पृथ्वी के श्वेत हृदय में.

मैं नहीं हूँ भावशून्यता, न ही क्षयता
और कठोरता,
मैं पत्थर का मौन हूँ
वह कठोर पत्थर
मेरी भयानक चीख है.

Jag är tystnaden

Jag är tystnaden
i fisken som simmar
över djupa havsblomsstigar
genom lundarna av tång.

Jag är tystnaden i ägget
där fågeln gror
under blåa skal
och nät av spunnet blod.
Jag är tystnaden
som stumma blommor känner
när träden sjunger sina stormar,
jag är det som lever
i jordens vita hjärta.

Jag är ej kyla, ej förruttnelse
och hårdhet,
jag är stenens tystnad
den hårda stenen
är mitt fruktansvärda skrik.

-Elsa Grave

Wednesday, July 11, 2012

कौन एक बच्चा नहीं है: वर्नर अस्पेंसट्रोम

वर्नर अस्पेंसट्रोम की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

एक दिन अपने जीवन के सत्तरवें वर्ष में
जब मैंने कोशिश की याद करने की कि कैसा अनुभव था
दुनिया में नवागंतुक होने का और स्वयं
ढूँढ़ना उसकी सात और सत्तर निविष्टियों को

तब मदद ली मैंने एक अवकाशप्राप्त प्रोफ़ेसर से,
सात भाषाओँ में दक्ष,
जो अश्रु पूर्ण नेत्रों से खड़ा था कक्ष में
और ढूंढ़ रहा था हाथ घुसाने की जगह कोट के आस्तीन में.

वह स्वयं करना चाहता था यह.

और हममें से कौन एक बच्चा नहीं है
और कौन नहीं है वह प्रोफ़ेसर?


Vem är ej ett barn

En dag i mitt sjuttionde levnadsår
då jag försökte erinra mig hur det kändes
att vara nykomling i världen och på egen hand
hitta dess sju och sjuttio ingångar.

fick jag hjälp av en professor emeritus,
herre över sju språk,
som gråtfärdig stod i tamburen
och letade efter handens infart i en rockärm.

Han ville själv.

Och vem av oss är ej ett barn
och vem är ej professor?

-Werner Aspenström

Tuesday, July 10, 2012

जुलाई की सांझ: योरान ग्रेइदर

योरान ग्रेइदर की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)


आप अँधेरे को नहीं समझ सकते
अगर आपको गोधूलि बेला समझ में नहीं आती:
वह धीरे धीरे दूर होता हुआ प्रकाश,
दिन के उजाले की नित परिवर्तनशील बर्खास्तगी,
उद्यान की असीम शांति
जब एक जुलाई की रात होती है पूर्ण.

Juliskymning

Du kan inte förstår mörkret
om du inte förstår skymningen:
Det sakta bortsilande ljuset,
dagrarnas steglösa upphörande,
trädgårdens fullkomliga lugn
när en julinatt fullbordas.

-Goran Greider

Monday, July 9, 2012

हम में से प्रत्येक: ब्रुनो के. ओइयर

ब्रुनो के. ओइयर की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)


मुझे नहीं थी किसी में भी सांत्वना की तलाश
अच्छी तरह से जानता था मैं
कि कोई सांत्वना है ही नहीं कहीं पाने के लिए
हम में से प्रत्येक एक द्वीप है
और अपने अँधेरे को हमें स्वयं ही खरोंचना होगा
अपनी बेबसी का ख्याल रखना होगा खुद ही
वह महान प्रकाश स्तम्भ जिसके होने की पुष्टि मिलती है
वह संयोगवश बहुत पहले ही लूट लिया गया है
लगभग हर इंसान वहन करता है
अपने खुद के छोटे से निष्ठुर प्रकाश को
देता है धोखा स्वयं को एवं औरों को भी
कितनी ही दूर या कितने ही लम्बे समय तक क्यों न यात्रा कर लें हम
शायद ही देख पाते हैं हम अपने सामने अपना हाथ
केवल एक साम्राज्य जो सदियों से है कायम
वह धरती के नीचे है
और मैं वहाँ अक्सर होता हूँ
मैं जाता हूँ उन सड़कों के किनारे से जो अब मौजूद ही नहीं हैं
बैठता हूँ ध्वस्त किये गए एवं भुलाये जा चुके कैफे में
लेकिन यह वही पुराना वेटर है
और मुझे इससे सहानुभूति है
वह निभाता है अंत तक अपनी भूमिका
मुझे और मेरे दोस्तों को शराब परोसता है
हमने हमेशा पिया
और जब हम एक दूसरे के साथ शुभकामना में ज़ाम टकराते हैं
तो वास्तव में कर रहे होते हैं यह हम कोहरे के साथ
क्यूंकि हम में से प्रत्येक जानता है
कि कोई दूसरा है ही नहीं
है दीर्घाकार तैल चित्र पर मात्र
लटका हुआ हमारे पीछे की दीवार पर
करता हुआ प्रतिनिधित्व आकृतियों के समूह का जिसने
उसे गिरफ्त में लिया हो
और कायदे से दूर रख दिया हो घास पर
पृष्ठभूमि में बहती हुई काली बर्फीली नदी
आघात करती है चारों ओर से उसपर
और वो करता है इंतज़ार हटाये जाने का
इंतज़ार करता है पूर्णतः आच्छादित हो जाने का

Var och en av oss

jag sökte inte tröst hos någon
jag visste mycket väl
att det inte finns någon tröst att få
var och en av oss är en ö
och måste kratta sitt eget mörker
ta hand om sin egen hjälplöshet
den stora fyren som som lär ha funnits
har plundrats för länge sedan
varje människa bär omkring
på sin egen lilla  ljuskärva
vilseleder sej själv och andra
hur långt och länge vi än reser
ser vi knappt ens handen framför oss
det enda rike som bestått genom årtusenden
är underjordens
och jag är ofta där
jag går längs gator som inte längre finns
sitter på cafeer som är rivna och glömda
men det är samme gamle kypare
och jag känner för honom
han spelar sin roll ända till slutet
serverar mej och mina vänner det vin
vi alltid drack
och när vi skålar med varandra
skålar vi med dimma
för var och en av oss vet
att det andre inte finns
bara på den avlånga oljemålningen
som hänger längs väggen bakom oss
och föreställer en samling gestalter som
gripit tag om sina hjärtan
och försiktigt lagt dom ifrån seg i gräset
den svarta iskalla floden i bakgrunden
hugger omkring seg
och väntar på att få komma loss
väntar på att få täcka över allt

-Bruno K. Öijer

Sunday, July 8, 2012

प्रश्न: योरान ग्रेइदर

योरान ग्रेइदर की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)


जब मुझसे पूछा जाता है
कैसे एक न्यायपूर्ण विश्व
संभव हो सकेगा
रखता हूँ मैं प्रश्न को
बायें हाथ में
और फिर दायें हाथ में:
उसका वज़न उसका मूल्य है.

Frågan

När jag får frågan
hur en rättvis värld
ska bli möjlig
lägger jag frågan
i den vänstra handen
och sedan i den högra:
Dess tyngd är dess värde.

-Göran Greider

Saturday, July 7, 2012

मौज़ूदगी: इन्ग्रिद काल्लेनबेक

इन्ग्रिद काल्लेनबेक की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

मैं अनुभव कर रही हूँ एक नयी मौज़ूदगी
पहुँचती हुई मेरी ओर.
ताकत किसी बहुत कमज़ोर की.
विचार और भाव पिघलते हैं
एक ही सांस में
और एक शांतिपूर्ण चेहरे पर.

मौत मात्र एक छोटा सा शब्द है
जिसका किया जा रहा है परिक्षण.
दुर्बल, खोजी एवं सर्वश्रेष्ठ
जीते हैं एक ही शक्ति होकर
और जीवन की संभावनाएं बनकर.
शेष सबकुछ मैंने विस्मृत कर दिया है.

Närvaro

Jag känner en ny närvaro
närma sig.
Styrkan i det mycket svaga.
Tankarna och känslorna smälter
i ett första andetag
och i en fred mot ansiktet.

Döden är bara ett litet ord
som prövas.
Det svaga, sökande och yttersta
lever som enda kraft
och livsmöjlighet.
Allt annat har jag glömt.

-Ingrid Kallenbäck

Friday, July 6, 2012

कितना: योरान ग्रेइदर

योरान ग्रेइदर की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)


कितना दुःख अभी भी शेष है?
हमें इसके बारे में कुछ नहीं पता.
रास्ते जो मुड़ते हैं
वहाँ मोड़ पर
नहीं बताते कुछ भी
जब तक हम वहाँ पहुँच न जाएँ.

Hur mycket

Hur mycket sorg är kvar?
Det vet vi inget om.
Vägen som vindlar
runt kröken därborta
berättar inget
innan vi kommit dit.

-Göran Greider

Thursday, July 5, 2012

अंतहीन रात: इन्ग्रिद काल्लेनबेक

इन्ग्रिद काल्लेनबेक की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

चेहरा और नियति
आगे पहुंचाए गए.
मस्तक खींचें गए
नीचे मुड़े चट्टानों पर
और अंतिम रूपांतरण.

उपस्थिति एक सम्पूर्ण भाव है.
जादुई और क्षणभंगुर
वास्तविकता के कांच में.

मृत्यु है मात्र
जीवन की पुनरावृति.

हर जगह खिले और नवजात चेहरे
प्रकाश के एकल अर्थ और सुकून के साथ 
मौन धड़कन और स्पंदन
रुधिर एवं शरीर की भेद्यता में.

Natt utan gräns

Ansikten och levnadsöden
forslas vidare.
Huvuden sugs fram
nedåtböjda mot stenar
och den sista förvandlingen.

Närvaron är en helgjuten förnimmelse.
Magisk och skör
mot verklighetens glas.

Döden är bara
en upprepning av livet.

Överallt genomblåsta och nyfödda ansikten
med ljusets enda betydelse och tröst
tyst bultande och vibrerande
i blodet och kroppens utsatthet.

-Ingrid Kallenbäck

Wednesday, July 4, 2012

निराशा: एरिक ब्लोमबेरी

एरिक ब्लोमबेरी की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)


धरती, माँ,
अंधकारमय और अचल,
फैलाओ अपनी बाहें
उनके लिए जो हैं निराश.

छुपा लो मेरे हृदय को,
छुपा लो मेरी आखें
सूर्य के झूठ से.

वह नीला अंतरिक्ष
करता है हमारे भाग्य का उपहास.

तुम हो लेकिन सत्य
 
जिसके स्वामित्व में होंगे हम सब.

Förtvivlan

Jord, moder,
mörk och stilla,
öppna din famn
för den som förtvivlar.

Göm mitt hjärta,
göm mina ögon
för solens lögner.

Den blåa rymden
gycklar vårt öde.

Du blott är sann
som skall äga oss alla.

-Erik Blomberg

Tuesday, July 3, 2012

आँसू: एल्सा ग्रावे

एल्सा ग्रावे की एक और कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

 
मेरे आँसू
नहीं बुझाते कोई आग,
और मेरी आग
नहीं
सुखाती कोई आँसू.

कभी नहीं सूखते मेरे आँसू,
वे बहते हैं,
वे बहते ही जाते हैं,
नहरों, नदियों और महासागरों तक,
और तब भी होते हैं
बेहतर नहीं.
फिर भी मैं एक साथ रो सकती हूँ एक विशाल सागर!
लाल आँखें
पीले पड़ गए गाल
रात और दिन आँसुओं से -

क्या दे रहे हैं संकेत कि
दुनिया का सारा पानी
सकल बारिश आकाश की
है सबके विरुद्ध जिस लिए इंसान अक्सर रोता है और रोता जाता है?

 

Gråten

Mina tårar
släcker ingen eld,
och min eld
torkar inga tårar.

Aldrig sinar mina tårar,
de rinna,
för rinna,
bäckar, floder och hav,
och ändå blir
ingenting bättre.
Än kan jag gråta ihop en stor ocean!
Röda ögon
bleka kinder
av tårar i nätter och dar -

Vad förslår
allt världens vatten
allt himlens regn
mot allt vad man gråter och gråter?

-Elsa Grave

Monday, July 2, 2012

विषय: स्तिग योहानसन

स्तिग योहानसन की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक) 


हमने बात की जीवन के बारे में, तुम्हारे और अपने जीवन के बारे में.
जब सब कह लिया गया
          अथवा जब और कुछ नहीं कहा जा सकता था
मुड़े हम थोड़ा शब्दों पर.

तुमने कहा कुछ सुन्दर,
                         मैंने किया परिहास.

इससे ज्यादा आगे नहीं जा सकता इंसान.
 

 Ämnet

Vi talade om livet, ditt och mitt.
När allt var sagt
           eller inget mer kunde sägas
vände vi lite på orden.

Du sade något vackert,
                              jag en lustighet.

Mycket längre än så kan man inte komma.

-Stig Johansson

Saturday, June 30, 2012

किविक के गिरिजाघर: स्तिग योहानसन

स्तिग योहानसन की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक) 


ईश्वर ने रचे सेब के बौर
कि मधुमक्खियों के जीवन को मिल सके अर्थ
और विश्राम स्थल के रूप में
               आँखों की ख़ुशी के लिए
रचे गए वे.

इसलिए ऐसे प्रत्येक पुष्प में
                           है एक
गिरिजाघर भी,
और कोई भी जो इनमें से किसी एक तक भी जाता है 
                      मात्र विचारों के धरातल पर ही सही
वह है अपने असल गृहक्षेत्र के सान्निध्य में ही.

Katedralerna i Kivik


Gud skapade äppelblom
för att binas liv skulle få mening
och som en plats att vila på
                         för vara ögons glädje.

Därför finns i varje sådan blomma
                                också en kyrka,
och den som besöker någon av dem
                          om så bara i tankarna
är nära sin verkliga hemtrakt.

-Stig Johansson

**Kivik is a locality situated in Simrishamn Municipality, Skåne County, Sweden

Friday, June 29, 2012

सागर इतना गहरा है: एल्सा ग्रावे

एल्सा ग्रावे की एक और कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक) 



सागर इतना गहरा है
पर्याप्त गहरा कि उससे सब कर सकते हैं प्यार,
वे सभी जो करते हैं प्यार डूबते सूरज से,
ओझल होती हुई नाव से
और उस स्वप्न से जो डूब गया
गहरे दिन के प्रकाश में

सागर इतना बड़ा है
पर्याप्त बड़ा कि उससे सब कर सकते हैं प्यार,
वे सभी जो करते हैं प्यार दूरस्थ, अजनबी सागर से
एक गरजते तूफ़ान से
और उस श्वेत पंछी से जो उड़ गया था
मगर वापस लौटा रक्ताभ पंखों के साथ,

सागर
इतना बड़ा है
इतना बड़ा
कि दो लोग जो प्यार करते हों
एक ही सागर से
भूल सकते हैं एक दूसरे को.

Havet är så djupt

Havet är så djupt
djupt nog att älskas av alla,
alla som älskar en sjunkande sol,
ett försvinnande segel
och drömmen som sjönk
djupt under dagens ljus

havet är så stort
stort nog att älskas av alla,
alla som älskar ett fjärran, främmande hav
en vinande storm
och den vita fågeln som flög bort
men vände åter med blodröda vingar,

havet är så stort
så djupt
att två som älskade
samma hav
kunde glömma varandra.



-Elsa Grave

Thursday, June 28, 2012

रात के साथ अकेले: एल्सा ग्रावे

एल्सा ग्रावे की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)


अब क्यूँ नहीं बोलते हैं घर
गाती नहीं सड़कें अब?
कुछ है नहीं अब कहने के लिए
गाने के लिए?
रात के दमघोंटू मौन कदम,
एक कंपकंपी है बनी हुई.
मूक मुड़ती है यंत्रणा झेलती, कुचली सड़क
आसपास हर कोने से.

मैं जा रही हूँ एक पीड़ादायक
और दिन भर की थकी हारी सड़क से,
जब मैं जाना बंद करूंगी,
खोलूंगी मैं एक सख़्त द्वार
एक मौन आवास में.

वहाँ रहूंगी मैं
रात के साथ अकेले.
 

Ensam med natten

Varför talar inte husen längre
sjunger inte gatan mer?
Finns inget mer att tala om
att sjunga för?
Natten kväver tysta steg,
en rysning återstår.
Tyst vrider plågad, trampad gata
sig kring alla hörn.

Jag går på en öm
och dagstrött gata,
när jag slutat gå,
skall jag öppna en svidande port
i ett tigande hus.

Därinne skall jag vara
ensam med natten.

-Elsa Grave

Wednesday, June 27, 2012

बच्चा पूछता है सूर्य के बारे में: वर्नर अस्पेंसट्रोम

वर्नर अस्पेंसट्रोम की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

प्रकाश का श्वेत झरना
बादलों के मध्य से, पत्तों के मध्य से
और बच्चे के प्रश्नों की चक्की से:
क्यों और क्यों?
संसार की सरलताएं नहीं की जा सकतीं
व्याख्यायित. न घास,
न प्रकाश का झरना, वह श्वेत,
अश्रव्य.

 Barnet frågar om solen

Ljusets vita vattenfall
genom molnen, genom löven
och på barnets frågekvarn:
varför och varför?
Världens enkelheter går ej
att förklara. Inte gräset,
inte ljusets vattenfall, det vita,
ohörbara.

-Werner Aspenström

Saturday, June 23, 2012

हृदय और मस्तिष्क: एल्सा ग्रावे

एल्सा ग्रावे की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)


हृदय और मस्तिष्क
वे इतने करीब रहते हैं संग,
सामान्य तौर पर एक ही किराये के मकान में.
कभी कभी घरों में
जहाँ हो उद्यान
और ग्रीष्म गृह एवं हरित गृह
और कलात्मक जालीयुक्त फाटक.
वे इतने करीब रहते हैं संग,
निकटतम पड़ोसी हैं वे.
लेकिन ऊँचा है उनके बीच का फाटक
और झाड़ियाँ है बिन कटी हुईं
और कांटेदार -
और पड़ोसियों में नहीं है कोई मेल-जोल,
उनका एक दूसरे के साथ तो बिलकुल नहीं.
कभी कभी - पतझड़ में
हृदय के उद्यान से गिरते हैं पत्ते
मस्तिष्क की सोच में.

कई लाली लिए हुए पत्ते
और सुनहरे
गिरते हैं और फंस जाते हैं नागफनी की झाड़ियों में.
जब आता है तूफ़ान
तब उठा ली जाती है पड़ोसी के घर की छत!

Hjärna och hjärta

Hjärna och hjärta
de bo så nära varandra,
oftast i samma hyreskasern.
Ibland i villor
med trädgård
och lusthus och växthus
och grindar med konstrikt galler.
De bo så nära varandra,
är närmaste grannar.
Men grinden är hög
och häcken oklippt
och törnig -
och grannarna umgås inte,
inte alls med varandra.
Ibland - om hösten
faller löv från hjärtats trädgård
ner i tankens.

Många röda löv
och gyllengula
faller ner och fastnar i hagtornshäcken.
När stormarna kommer
då lyftes taket på grannens villa!

-Elsa Grave

Thursday, June 21, 2012

विरासत: ब्रुनो के. ओइयर

ब्रुनो के. ओइयर की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

मेरी इच्छा है
कि होता सबकुछ भिन्न
मैं चाहता हूँ कि दुनिया के प्रति मेरी दृष्टि
परिवर्तित हो जाती
मेरे हाथों की एक सुन्दर नाज़ुक सी वस्तु में
जैसे हो वह कांच से बनी हुई हवा से भी हल्की
और जब मैं उसे स्वयं से दूर खड़ा करूँ
उसकी कोई परछाईं न पड़े
काश कि मैं भूल सकता
काश कि दुःख और पीड़ा होते ही नहीं
मगर दुःख एक सत्य है
दुःख एक प्रमाण है कि तुमने जी है ज़िन्दगी
और रहे हो यहाँ
दुःख ख़रीदा या बेचा नहीं जा सकता
दुःख रेंगता नहीं है किसी के लिए
जीवन काल और संवेदनहीन समाज
तुमसे छीन सकते हैं सर्वस्व
लूट सकते हैं तुम्हारा सब कुछ
मगर कोई तुमसे तुम्हारे अनुभव नहीं चुरा सकता
कोई तुमसे तुम्हारी यादें नहीं ले सकता
कोई नहीं लूट सकता तुमसे तुम्हारे दुःख

Arvet

jag önskar
att allt var annorlunda
jag önskar att min syn på världen
kunde förvandlas till ett
vackert ömtåligt föremål i mina händer
som något gjort av glas tunnare än luft
och när jag ställer det ifrån mej
kastar det ingen skugga
jag önskar att jag kunde glömma
jag önskar att sorg och lidande inte fanns
men sorg är sanning
sorg är ett bevis på att du levt
och funnits här
sorg kan inte köpas eller säljas
sorg kryper inte för någon
livet tiden och ett iskallt samhälle
kan ta ifrån dej allt
råna dej på allt
men ingen kan stjäla dina upplevelser
ingen kan ta dina minnen ifrån dej
ingen kan råna dej på din sorg

-Bruno K. Öijer

हृदय की भट्टी: जैक वैरूप

जैक वैरूप की एक और कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)


मैंने एक प्यास बुझाने की कोशिश की,
पर जल एक दर्पण था,
मैंने स्वयं पी अपनी ही तस्वीर -
यह मुझे दे गया और अधिक प्यास.

मैंने कोशिश की सीखने की आनंदित रहना,
लेकिन आनंद नहीं था मेरे लिए,
इसने मुझे कोई राहत नहीं दी.

मैंने कोशिश की सीखने की प्यार करना,
लेकिन प्यार ने निर्मित किया एक अन्य
और वृहद अकेलेपन को -
एक अप्राप्य स्वप्नलोक.

मैंने जीना सीखने की कोशिश की
और प्रयास किया मृत्यु को समझने का,
अभ्यस्त हो गया खोते जाने का
एक जीवन जिसे मैंने मात्र स्वप्न में ही देखा -
एक दूसरा जीवन, किसी अन्य व्यक्ति का जीवन.

मैंने वास्तव में कोशिश की मरना सीखने की,
मैंने वास्तव में जीना सीखने का प्रयास किया.



Hjärtats ugn

Jag försökte släcka en törst,
men vattnet var en spegel,
jag drack min egen bild -
den gav mig större törst.

Jag försökte lära mig njuta,
men vällusten var inte min,
den gav mig ingen lättnad.

Jag försökte lära mig älska,
men kärleken skapade en annan
och större ensamhet -
en ouppnåelig utopi.

Jag försökte lära mig leva
och jag försökte förstå att dö,
vande mig vid att förlora
ett liv jag bara drömt -
ett annat liv, någon annans liv.

Jag försökte verkligen lära mig dö,
jag försökte verkligen lära mig leva.

-Jacques Werup

Wednesday, June 20, 2012

प्रेम का निवास स्थल: एल्फ हेनरिकसन

एल्फ हेनरिकसन की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)


पहले हृदय में स्थित था प्रेम, कहाँ विराजमान है वह अब?
हृदय तो मात्र एक धौकनी है, जैसा कि सब जानते हैं.
इसलिए कतिपय प्रेम के पास स्थायी पते का अभाव है,
     अथवा आपको क्या लगता है.
वह बन जाता है रसायन और हार्मोन, और
     कोई अन्य विलक्षणता.
वह है बेघर आज अन्य अनेक लोगों की तरह, जब आवासीय-
     ज़रूरतें कटु हैं.
कोई इंसान नहीं जानता कि कहाँ है वह विराजमान.

Kärlekens boning

I hjärtat satt kärleken förr, var sitter den nu?
Hjärtat är bara en pump, såsom alla vet.
Så kärleken saknar visst fast address,
     eller vad tycker du.
Den är vorden kemi och hormoner och
     annan underlighet.
Den är hemlös som så mycket annat idag när bostads-
      nöden är bitter.
Ingen människa vet var den sitter.

-Alf Henrikson

Friday, June 15, 2012

पीड़ा में होना कठिन है: गुन्नर इकेलोफ़

गुन्नर इकेलोफ़ की एक और कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

पीड़ा में होना कठिन है
पीड़ा में होना प्रेम के बिना कठिन है
प्रेम करना संभव नहीं है बिना पीड़ा में पड़े हुए
प्रेम करना कठिन है

Att lida är svårt

Att lida är svårt
Att lida utan att älska är svårt
Att älska utan att lida är icke möjligt
Att älska är svårt

-Gunnar Ekelöf

Thursday, June 14, 2012

मौत की कृपा: जैक वैरूप

जैक वैरूप की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

मृतकों की रात में नहीं होता हमारा अस्तित्व.
मृतकों की दृष्टि में हम ही मरे हुए हैं.

जीवित रहने वालों में ही रोशन होते हैं मृत.
वो हमारे साथ मेज़ पर बैठते हैं.
वो हँसते और गाते हैं,
होते हैं सुन्दर, जैसे वास्तव में रहे होंगे शायद उसकी तुलना में अधिक ही.

और हम उन्हें करते हैं प्यार, शायद
पहले से भी अधिक, उन्हें बचाए रखते हैं हम
हृदय के करीब, यहाँ

मौत की उज्जवल कृपा में.

Dödens nåd

I de dödas natt finns inte vi.
För de döda är det vi som dött.

I de levandes ljus de döda.
De sitter till bords med oss.
De skrattar och sjunger,
är vackrare än de kanske var.

Och vi älskar dem, kanske
mer än förr, håller dem
kära kvar hos oss, här

i dödens ljusa nåd.

-Jacques Werup

Sunday, June 10, 2012

घर: थोमस तिदहोल्म

थोमस तिदहोल्म की एक और कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठ)

वहां बैठा हूँ मैं सम्पूर्ण के एक अंश के साथ
और शेष यात्रारत है निहारिकाओं के मध्य
मुझे याद नहीं
कहाँ

घर
-मैं तलाश रहा था नक्शे पर एक स्थल, एक अनूठा
मायावी स्थल

लेकिन घर एक समय भी हो सकता है
परदे से रहित खिड़की से दृश्यमान
मेघयुक्त मौसम का वसंत के प्रति रुझान

एक घर समय का
टहनियां, तुषार-वृष्टि, पकाया हुआ मांस
एक समय जब बच्चे खेत में दौड़ा करते थे
कई बार भीतर आते थे
और उन्हें मेरी ज़रुरत होती थी, या औसधि की

वही था घर
उसकी औसधियाँ, वह विलंबकारी वसंत
और जबकि हम भी थे वहाँ तब

मुझे उस समय से आगे बढ़ना होगा

मैं पुनः कहता हूँ: वह समय खो चुका है
वहाँ अब कोई नहीं चलता

घर पुनः अब एक अनजान देश है
और अब खुले पड़े हैं सभी देशों के विकल्प

सागर
है लगभग हर जगह व्याप्त

दुनिया भरी हुई है अवसरों से
बेघर के लिए

Hem

Där jag sitter med en del av det hela
och resten på driven bland nebulosorna
minns jag inte
var

Hem
-jag letade på kartan efter en plats, en underlig
undflyende plats

Men hem kan ju lika gärna vara en tid
sedd genom ett fönster utan gardiner
med vädret brunmulet lutande mot vår

Ett hem av tid
påskris, blötsnö, kokt fårkött
En tid när det sprang barn på gården
kom in ibland
och behövde mig, eller plåster

Det var det som var hemma
dessa plåster, den senfärdiga våren
och att vi var där då

Jag måste gå vidarefrån den tiden

Jag upprepar: den tiden är förlorad
Ingen springer där längre

Hem är ett främmande land igen
Och nu står alla länder öppna

Havet hörs
nästan överallt

Världen är full of möjligheter
för de hemlösa

-Thomas Tidholm

Friday, June 1, 2012

दुःख: विल्हेल्म इकेलुन्द

विल्हेल्म इकेलुन्द की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

किनारों पर उजाड़ पहाड़ियां
उदास रात को कर देती हैं और काला,
धूसर और घटाटोप सांझ से
निकलता है एक कालीन चमकीले रंगों वाला.

एक रूदन, एक मौन सिसकी,
जैसे स्पंदन हो समंदर में -
बहुत थके हुए और
लड़खड़ाते हुए है गिरता
वह चुपचाप अपनी कब्र में.


Sorg

De ödsliga strändernas kullar
mörkna mot tungsint natt,
ur grå och regntung skymning
lyser en rännil matt.

En gråt, en tonlös snyftning,
som darrar över hav -
och tröt och famlande sjunker
den ljudlöst i sin grav.

-Vilhelm Ekelund

Thursday, May 31, 2012

कहाँ की हमने राह ली: थोमस तिदहोल्म

थोमस तिदहोल्म की एक और कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठ)

उसने कहा: तुम अपने बारे में कुछ बात क्यूँ नहीं करते
मगर मैंने कहा: यह पूरी तरह से भ्रामक होगा

क्यूंकि मैं अपने आप में जो था
वह तो एक दशक पहले ही मुझसे खो गया
और फिर बाद में कभी भी पाया नहीं गया

इस बीच वह तुम्हारे भीतर बढ़ता रहा
और ग्रहण करता रहा अधिक से अधिक अपने भीतर तुम्हें
वह बैठा है यहाँ तुम्हारी मेज़ के पास
और तुम खुद देख रही हो कैसे वह खोल रहा है स्वयं को

तुम्हारी ओर, और उस सब की ओर जो तुमने यहाँ निर्धारित किया हुआ है
मैं खाता हूँ और पीता हूँ, मैं तुम्हें धन्यवाद देता हूँ
और जब मैं उठूँगा अपने आप को छोड़ जाऊँगा

और फिर तुम मेज़ साफ़ करोगी, चिकोटी काटोगी पौधे को
जो खड़ा है खिड़की से लगे और शायद सोचोगी साश्चर्य
अपने और मेरे बारे में, कहाँ की हमने राह ली

Vart vi tog vägen

Hon sa: Du kan väl tala lite om dig själv
Men jag sa: Det vore helt missvisande

För det som är mig själv i mig
gick förlorat för ett årtionde sedan
och har därefter aldrig återfunnits

Medan det istället förväxer sig i dig
och får mer och mer av dig i sig
Det sitter här vid ditt bord
och du ser själv hur det öppnar sig

in emot dig, och allt du har ställt fram här
Jag äter och dricker, jag tackar dig
och när jag reser mig ska jag lämna mig

Och du ska duka av, nypa lite i växterna
som står i fönstret och kanske undra
om dig och mig, vart vi tog vägen

-Thomas Tidholm

Wednesday, May 30, 2012

मैंने देखी एक जोड़ी कठोर आँखें: गुन्नर इकेलोफ़

गुन्नर इकेलोफ़ की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

मैंने देखी एक जोड़ी कठोर आँखें
मैंने उन्हें प्यार किया
मैंने देखी एक जोड़ी सुन्दर आँखें
मैंने उन्हें प्यार किया
मैंने देखी एक जोड़ी वाचाल आँखें
मैंने उन्हें प्यार किया
मैंने देखी एक जोड़ी संवेदनापूर्ण आँखें
मैं उन्हें कभी भूल नहीं पाया.

Jag såg ett par hårda ögon

Jag såg ett par hårda ögon
jag älskade dem
Jag såg ett par ljuva ögon
jag älskade dem
Jag såg ett par fräcka ögon
jag älskade dem
Jag såg ett par varma ögon
jag glömde de aldrig.

-Gunnar Ekelöf

इस समय से पहले: थोमस तिदहोल्म

थोमस तिदहोल्म की एक और कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठ)

मैं अपने बारे में भूल गया
मैं देख रहा हूँ समय को उस रूप में जैसा वह था तब
जो पहले पहल था
जो पहले से था
यह उससे पहले से था जब हमारे पास घर होने शुरू हुए
मुझे संकोच हो रहा है कहते हुए कि
यह उससे पहले से था जब हमारे पास पतलून हुए
उससे पहले जब सब बातें गंभीर हो गयीं
वह समय एक सौदेबाज़ी थी
काला-उजला सूरज चमकता था
उससे पहले जब हम छोटे थे. उससे पहले जब हम बच्चे थे
सूरज चमकता था. हम खुद के बाहर थे. अजन्मे
हमने सब नष्ट कर दिया
बस जीना शुरू करते ही

Tiden innan


Jag glömde bort mig
Jag ser på den tiden som den var då
Det var innan
Det var förut
Det var innan vi hade ett hem
Jag är blyg för att säga det
Det var innan vi hade byxor
Innan det blev allvar
Den tiden var ett fynd
Den svartvita solen lyste
Innan vi var små. Innan vi var barn
Solen lyste. Vi var utom oss. Ofödda
Vi förstörde allt
bara genom att börja leva

-Thomas Tidholm

Tuesday, May 29, 2012

नेपाल: थोमस तिदहोल्म

थोमस तिदहोल्म की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठ)

एक आदमी अपनी स्त्री को ले गया
नेपाल, और बिखेर दिया उसे वहाँ
क्यूंकि वह मर चुकी थी. अब वह वहाँ थी.
और फिर घर लौट कर, उसने सोचा:
अब वह वहाँ है.
अब वह वहाँ है और जीवित है
नेपाल के पहाड़ों में
और घर कभी नहीं लौटेगी.

और मैं यहाँ हूँ
और कभी नहीं लौटूंगा
घर.

Nepal

En man tog sin kvinna
till Nepal, och strödde henne där
för hon var död. Nu var hon där.
Och sedan hemma tänkte han:
Nu är hon där.
Nu är hon där och lever
bland bergen i Nepal
och kommer aldrig mera hem.

Och jag är här
och kommer aldrig mera
hem.

-Thomas Tidholm

Monday, May 28, 2012

हे कविता!: विल्हेल्म इकेलुन्द

विल्हेल्म इकेलुन्द की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

हे कविता!
वो हिम्मत नहीं करेगा
आने की तेरे निकट,
जिसकी आत्मा में निहित नहीं हैं
सपने,
सपने देखने की पर्याप्त उर्जा
सपने सजाने की हिम्मत -
शब्द!
शब्द का पुनर्जन्म.

है जिनके गर्जन में-: "यथार्थ अज्ञात है!"
हर उस बात के लिए जिसमें सांस लेती है आस्था,
वास्तविक जीवन का उत्साह;
हैं वो शब्दों को खड़खड़ाने वाले,
उनकी आत्मा ने कभी नहीं चखी
स्वप्न की मदिरा,
शब्द का रक्त.


O, POESI!

O, Poesi!
Ingen skulle våga
att nalkas dig,
som ej har i själen
dröms,
drömkrafts dristighet nog
att våga drömma -
Ordet!
Ordets pånyttfödelse.

O, I
som skrien-: "verklighets främmande!"
på allt som andas Tro,
Verklighets kärlek;
ni ordskramlare,
aldrig har er själ smakat
Drömmens Vin,
Ordets blod.

-Vilhelm Ekelund

Friday, April 27, 2012

आप अकेले नहीं हैं: कार्ल योनस लोव एल्मक्विस्त

कार्ल योनस लोव एल्मक्विस्त की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

अगर हज़ार सितारों के बीच
कोई एक भी आपको देख रहा है,
तो उस सितारे की राय पर विश्वास करिए,
विश्वास करिए उसकी आँखों की चमक पर.

आप अकेले नहीं हैं.
सितारों के हज़ार दोस्त हैं;
और वे सभी आपको देखते हैं,
देखिये उन्हें उनकी ख़ातिर.

ख़ुश हैं आप और ख़ुशकिस्मत भी.
आकाश है आपके साथ इस शाम.

Du går icke ensam

Om bland tusen stjärnor
någon enda ser på dig,
tro på den stjärnans mening,
tro hennes ögas glans.

Du går icke ensam.
Stjärnan har tusen vänner;
alla på dig de skåda,
skåda för hennes skull.

Lycklig du är och säll.
Himlen dig har i kväll.

-Carl Jonas Love Almqvist

Monday, April 16, 2012

दृश्य: लार्स लुन्द्क्विस्त

लार्स लुन्द्क्विस्त की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

क्या
आपने पीला आकाश देखा है
हरे रंग के बादलों के साथ,

देखा है एक
नीले जंगल में
काले घोड़ों को शुद्ध सफेद बर्फ़ पर?

क्या आपने देखी है ये तस्वीर
किसी बिंदु पर?

तो फिर छिपा लीजिये इसे स्मृति की चादर में लपेट
देवदार
की लकड़ियों से बने एक बॉक्स में

और इसे धारण कर लीजिये हृदय
पर.
यह
दृश्य फिर कभी आपको देखने को नहीं मिलेगा.

Syn

Har du sett en citrongul himmel
med gröna moln,

en blå skog
med svarta hästar i kritvit snö?

Har du sett den bilden
någon gång?

Göm den då i sparlakansväv
i en ask av cederträ

och bär den vid hjärtat.
Du får aldrig se den igen.

-Lars Lundkvist

Friday, April 6, 2012

हर एक इंसान अपने आप में एक दुनिया है: गुन्नर इकेलोफ़

गुन्नर इकेलोफ़ की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

हर एक इंसान अपने आप में एक दुनिया है, जीवों से भरा हुआ
जो हैं अंधे विद्रोह में
अपने आप के ही खिलाफ जो राजा सम राज करता है उन पर.
हर आत्मा में एक हजार आत्माएं बंदी हैं,
प्रत्येक दुनिया में एक हजार और दुनिया है छिपी हुई
और ये अंधी, ये छिपी हुई दुनिया
असल है और जीवंत है, हालांकि अपरिपक्व है,
उतनी ही सच्ची जितना कि सच्चा मेरा अस्तित्व है. और हम राजा लोग
और हमारे भीतर उपस्थित हज़ार संभावित राजकुमार
स्वयं ही विषयों के दास हैं, स्वयं ही बंदी हैं
किसी दिव्य आकृति में, जिसके अस्तित्व और स्वरुप को
उसी रूप में लेते हैं हम जैसे हमारे वरिष्ठ लेते हैं
अपने वरिष्ठों को. उनकी मृत्यु और उनके प्रेम से
हमारी अपनी भावनाओं ने पाया है एक रंग.

जैसे कि जब एक बेहद शक्तिशाली स्टीमर गुज़रता है
सुदूर, क्षितिज पर, वहाँ होती है
बेहद चमकीली शाम. -और हम नहीं जानते कि
जबतक एक लहर पहुँचती है समुद्री तट पर
हम तक,
पहले एक, फिर एक और फिर अनगिनत
करती है शोर और धड़कती है तब तक जबतक कि सबकुछ नहीं हो जाता
पूर्ववत. -सब कुछ फिर भी अलग ही होता है.

फिर हम एक विलक्षण चिंता कि छाया में होते है
जब कुछ संकेत हमें बताते हैं कि लोग यात्रा कर चुके हैं,
कि उनमें से कुछ को संभावित मुक्ति मिल चुकी है.

En värld är varje människa

En värld är varje människa, befolkad
av blinda varelser i dunkelt uppror
mot jaget konungen som härskar över dem.
I varje själ är tusen själar fångna,
i varje värld är tusen världar dolda
och dessa blinda, dessa undre världar
är verkliga och levande, fast ofullgångna,
så sant som jag är verklig. Och vi konungar
och furstar av de tusen möjliga inom oss
är själva undersåtar, fångna själva
i någon större varelse, vars jag och väsen
vi lika litet fattar som vår överman
sin överman. Av deras död och kärlek
har våra egna känslor fått en färgton.

Som när en väldig ångare passerar
långt ute, under horisonten, där den ligger
så aftonblank. - Och vi vet inte om den
förrän en svallvåg når till oss på stranden,
först en, så ännu en och många flera
som slår och brusar till dess allt har blivit
som förut. - Allt är ändå annorlunda.

Så grips vi skuggor av en sällsam oro
när något säger oss att folk har färdats,
att några av de möjliga befriats.

-Gunnar Ekelöf

उपहार: एब्बा लिन्द्क्विस्त

एब्बा लिन्द्क्विस्त की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक )

मैं तुम्हें ऐसा उपहार देना चाहती थी
जो मैंने किसी को नहीं दिया अब तक.
इसलिए मैं देती हूँ तुम्हें अपना अकेलापन,
यह है रहता साथ जीवन के अंत तक.

Gåva

Jag ville ge dig en gåva
jag gett till ingen förut.
Så ger jag dig min ensamhet,
den varar till livets slut.

-Ebba Lindqvist

Wednesday, March 28, 2012

तुम्हारा दुःख तुम्हारा है: विक्टर रिदबेरी

विक्टर रिदबेरी की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

हे मनुष्य, भले कितना ही भार महसूस हो,
अपने ही समान दुर्बल साथियों में खोजो नहीं संवेदना!
न दो अपना दुःख पहले से ही दुःख से भारी किसी और हृदय को!
तुम्हारा दुःख तुम्हारा है, और तुम्हें उसे अपने ही पास रखना चाहिए.

Din sorg är din

Du mänskobarn, hur tung din lott du känne,
sök ej hos dina svaga likar tröst!
Lägg ej din sorg på redan tyngda bröst!
Din sorg är din, och du bör bära henne.

-Viktor Rydberg

Friday, March 9, 2012

दुःख: पेर दानिएल अमदेउस अत्तेर्बोम

पेर दानिएल अमदेउस अत्तेर्बोम की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

निश्चित रूप से इस दुनिया में कोई नहीं है,
जो जानता है, क्यूँ दुःख की शिकायत करते हैं;
वह इंसान, जो स्वयं उसे धारण किये हुए है:
उसे वह मजबूर करती है रात और दिन.

मैं काली रात में एक पक्षी की तरह हूँ,
जो शाखा पर अकेला बैठा है,
आसमान के नीचे बहुत ऊँचाई पर, गाँव की धरती से बहुत दूर,
जब बर्फ़ गिरती है हिरन की सी तेजी लिए.

मैंने सुना कैसे अंगूर की बेल कट गयी थी,
तब पत्ते और जलडमरूमध्य गरजे थे:
अब आ रहा है मेरे हृदय में पूर्ण शिथिलता के साथ पतझड़,
और अब मुझे चुप रहने दो, कुञ्ज की तरह.

एक तारा जिसे मैंने जाना था, वह मेरे लिए अनुग्रहकारी था;
वह मेरे मन से विलग नहीं हो सकता!
व्यर्थ में स्मृति से किसी आवाज़ की उम्मीद लगाये बैठा हूँ,
लेकिन यह नेह की ही स्मृति है.

Sorg

Det är visst ingen i världen till,
Som vet, varför sorgen klagar;
Förutan den man, som själv henne bär:
Hon tvingar honom nätter och dagar.

Jag är som en fågel i kolsvart kväll,
Som sitter ensam på grenen,
Så högt under sky, så långt ifrå by,
När snö faller redan på renen.

Jag hörde hur kornet av lian skars,
Då brusade löven och sunden;
Nu kommer med slagan mitt hjärtas höst,
Och nu må jag tiga, som lunden.

En stjärna jag kände, hon var mig huld;
Ej slockna hon kan i mitt sinne!
Ty fåfängt är vänta på minnetröst,
Men nog är kärleken minne.

-Per Daniel Amadeus Atterbom

Thursday, March 8, 2012

स्वर्गिक रात्रि: एरिक गुस्ताफ़ गेइएर

एरिक गुस्ताफ़ गेइएर की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक )

अकेला मैं अपने प्रगति पथ पर बढ़ रहा हूँ,
दूर और दूर फैलती जा रही है राह.
आह! ये दूरी मेरे लक्ष्य को धुंधला कर रही है.
दिन सिकुड़ रहा है. रात्रि अंतरिक्ष बन जाती है.
और फिर जल्द ही केवल अनंत तारों को मैं देख पा रहा हूँ.

लेकिन मैं दिन के ढ़ल जाने की शिकायत नहीं कर रहा.
न ही रात के आने से भयभीत हूँ.
क्यूंकि वह प्यार, जो सारे संसार में विचरण करता है,
समा गया है मेरी आत्मा की एक किरण में.

Natthimmelen

Ensam jag skrider fram på min bana,
Längre och längre sträcker sig vägen.
Ack! uti fjärran döljes mitt mål.
Dagen sig sänker. Nattlig blir rymden.
Snart blott de eviga stjärnor jag ser.

Men jag ej klagar flyende dagen.
Ej mig förfärar stundande natten.
Ty av den kärlek, som går genom världen,
Föll ock en strimma in i min själ.

- Erik Gustaf Geijer

सिर्फ एक मिनट: सोल्वेग वोन स्कुल्त्ज़

सोल्वेग वोन स्कुल्त्ज़ की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

सिर्फ एक मिनट मेरे हाथ में है:
नीचले टापू हरे पानी में बहते हैं.
पानी में उगने वाली घास डुबकी लगाती है. एक उज्जवल धारी:
सौर उर्जा की एक कातर डुबकी.
विशालकाय बादलों के संसार को
एक अदृश्य हाथ जकड़ लेता है.
बेध डालता है नीली-रात्री को,
भूरे और अस्पष्ट रंगों से.
रौशनी उमड़ पड़ती है. किसने डुबो दिया है
ईश्वर का हृदय हरे पानी में?


En enda minut

En enda minut är i min hand:
låg ö rinner ut i grönt vatten.
Vassvippors dropp. En lysande rand:
skygg doppings solsläp.
Världar av jätteskyar
dem en osunlig hand grep.
Tränger åt sidan nattblå,
duvgrå och dimgrå.
Ljus brister ut. Vem sänker ner
Guds hjärta i grönt vatten?

- Solveig Von Schoultz

वसंत ऋतु: वर्नर वोन हेइदेन्स्तम

वर्नर वोन हेइदेन्स्तम की एक और कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

अब यह दुखद है मर चुके लोगों के लिए,
वे वसंत ऋतु का आनंद लेने में सक्षम नहीं हैं
और सूर्य की रौशनी महसूस नहीं कर सकते
प्रकाशयुक्त सुन्दर पुष्पों के बीच बैठ कर.
लेकिन शायद मृत आत्माएं फुसफुसाती हैं
शब्द, फूल और वायलिन के माध्यम से,
जो कोई जीवित प्राणी नहीं समझता.
मृतात्माएं हमारी तुलना में अधिक जानती हैं.
और शायद वे वैसा ही करेंगी, जैसा कि सूरज करता है,
पुनः एक हर्ष के साथ, जो हमसे कहीं अधिक गहरी है
शाम की छाया के संग विचार की उस सीमा तक विचर जाता है
जहां रहस्य ही रहस्य है,
जो केवल कब्र को ज्ञात है.

Vårens tid


Nu är det synd om de döda,
som ej få sitta i vårens tid
och värma sig i solen
på ljus och ljuvlig blomsterlid.
Men kanske viskade de döda
då ord till vivan och violen,
som ingen levande förstår.
De döda veta mer än andra.
Och kanske skulle de, när solen går,
då med en glädje, djupare än vår
bland kvällens skuggor ännu vandra
i tankar på den hemlighet,
som bara graven vet.

- Verner Von Heidenstam

Wednesday, March 7, 2012

लंबी पैदल यात्रा: वर्नर वोन हेइदेन्स्तम

वर्नर वोन हेइदेन्स्तम की एक और कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

मैं वापस चलता हूँ उस पुल पर, जो ले जा रही है
पृथ्वी से दूर अपरिचित की ओर
और स्वयं दूरी बन जाता हूँ मैं जो पहले कभी था.
वहां नीचे हो रही है आलोचना और चल रहा है विरोध
और तीर चल रहे हैं युद्ध की परंपरा के अंतर्गत,
लेकिन जहाँ मैं जा रहा हूँ, वहाँ देखता हूँ, कि सही और सम्माननीय
मेरे दुश्मनों के कवच पर भी अंकित है.
जीवन का स्वर अब मुझे और भ्रमित नहीं कर सकता.
मैं इतना अकेला हूँ जितना कि एक इंसान हो सकता है,
लेकिन स्पष्ट है अंतरिक्ष, ऊँचा और स्थिर,
और मैं स्वयं को भूल चुका हूँ और स्वतंत्र विचर रहा हूँ.
मैं अपने जूते ठीक करता हूँ और छड़ी फेंक देता हूँ.
मैं चुपचाप वहाँ जाऊँगा, और धूल धुंधला न कर सकेगी
उस दुनिया को, जहाँ सबकुछ शुद्ध श्वेत है बर्फ़ की तरह.
वहाँ नीचे वे ढ़ोते हैं एक बार कब्र तक
एक दीन इंसानी मिट्टी और बुदबुदाते हैं
एक नाम - वह नाम, जो कभी मेरा था.

Begynd vandring

Jag vandrar redan på den bro, som leder
från jorden mot det obekanta,
och fjärran blir mig vad mig förr var när.
Där nere rosa de och danta
och pilar smidas efter krigarseder,
men där jag går, jag ser, att rätt och heder
min ovän ock på skölden skrivet bär.
Ej livets röster längre mig förvilla.
Jag är så ensam som en man kan bli,
men klar är rymden, hög och vinterstilla,
och jag har glömt mig själv och vandrar fri.
Jag löser mina skor och kastar staven.
Jag vill gå tyst, och intet damm får grumla
en värld, där allt är rent som snö och vitt.
Där nere bära de en gång till graven
ett stackars mänskligt stoft och mumla
ett namn - det namnet, det var en gång mitt.

- Verner Von Heidenstam

Saturday, March 3, 2012

आज ही मैं जीवित हूँ: कार्ल वेनबेरी

कार्ल वेनबेरी की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक )

आज ही मैं जीवित हूँ,
भले ही केवल आधी उर्जा के साथ.
धैर्यवान सूर्य का प्रकाश
खिड़कियों के बीचोंबीच पड़ रहा है.

और वह सबकुछ जो मेरे साथ हुआ है
और सब जो मैंने चाहते या चाहते हुए होने दिया है
इर्द गिर्द लापरवाही से पड़ा है
त्यक्त पुराने वस्त्रों की तरह.

और किसी कबाड़ कोने में:
पड़ी है मेरी श्रद्धा कैक्टस की भांति,
आत्मा की आवाज़ भी खामोश है
यद्यपि हम एक दूसरे के साथ हर विषय पर झगड़ चुके हैं,
जिस सत्य ने मुझे अब तक किया है निर्देशित,
वह अब शुचिता की दृष्टि से एल्यूमीनियम पन्नी में लिपटा हुआ है.

जीवन इसीलिए मज़बूत रहा होगा.
हे उत्कृष्ट धैर्यवान सूर्य,
आज ही मैं जीवित हूँ.
मैं आप पर छोड़ता हूँ
अरबों वर्ष
जो मेरे पीछे और मेरे सामने अपनी अपनी विस्मृतियों के साथ खड़े हैं.


Det är i dag jag lever

Det är ju i dag jag lever,
om så bara med halv låga.
Det faller ljus från en tålmodig sol
rakt in genom mitt nerfläckade fönster.

Och allt som har skett med mig
och allt jag med glädje eller olust har låtit ske
ligger vårdslöst slängt omkring mig
som avlagda kläder.

Och där i någon skräpvrå:
min tro som en nerpissad kaktus,
samvetet som har tystnat
fast vi har allting otalt med varandra,
sanningar som vägledde mig,
nu hygieniskt insvepta i aluminiumfolie.

Livet var alltså starkare.
O goda tålmodiga sol,
det är i dag jag lever.
Åt dig överlåter jag
miljarderna av år
som ligger bakom och framför mig med sin glömska.

-Karl Vennberg

Saturday, February 25, 2012

जीवन: वर्नर अस्पेंसट्रोम

वर्नर अस्पेंसट्रोम की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

मुश्किल से एक राय,
लेकिन नदी की ओर स्पष्ट दृष्टिकोण.
जैसे कमल
और कीचड़.
दो बतख तैर रहे हैं
एक दूसरे की ओर, उत्सुकता से,
बिना कुछ ज़्यादा समझे,
बनाते हैं जीने का आधार,
जीवन के अव्ययों से सूर्य की लालिमा में,
एक तूफ़ान से परे
और तैरते हैं फिर
एक दूसरे के विरुद्ध, अभी भी,
बिना कुछ ज़्यादा समझे.
यहाँ अब भी एक जीवन है.
यह है दो पक्षी का जीवन.

Levnad

Knappast en åsikt,
men fri sikt mot en å,
Näckrosor, gärna det,
och vassruggar.
Två änder simmar
emot varandra, nyfiket,
utan att mycket förstå,
bygger bo,
förnöjer sig i solskenet,
skiljs åt av ett åskväder
och simmar ånyo
emot varandra, stilla,
utan att mycket förstå.
Det är ändå en levnad.
Det är två fåglars liv.

-Werner Aspenström

कविता: एक मुस्कुराता कुञ्ज: रब्बे एन्गकेल

रब्बे एन्गकेल की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

कविता: एक मुस्कुराता कुञ्ज -
यहाँ सारे विवश गुलाब मुक्त हुए
किसी भी पावन गह्वर से अधिक सुगन्धित
एक आत्मा उड़ान में प्रत्यक्ष -


Dikt: en leende berså

Dikt: en leende berså -
Här blev tvångets rosor fria
doftande än av någon avgrund
en själ i flykt förnummet -

-Rabbe Enckell

अगर मैं छोटा बच्चा होता: वर्नर वोन हेइदेन्स्तम

वर्नर वोन हेइदेन्स्तम की एक और कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

अगर मैं छोटा बच्चा होता,
तो मैं बाहर जाता और खेलता,
अपने लिए एक छोटी सी चक्की बनाता
और अपनी छोटी सी नाव चलाता.

बहुत सारे दोस्त, जो मैंने बनाये,
उजले चादर के नीचे सबने आँखें मूंदी हुई हैं,
और अब मैं एक बूढ़ा आदमी हूँ,
अग्नि के पास बैठा हुआ और वहीँ स्थित.

रहस्य, गाथा, आज के गठन को,
आपकी गहराई को कोई नहीं थाह सकता.
फिर भी मैं वही बच्चा हूँ
और लोग अच्छे हैं.

Vore jag ett litet barn

Vore jag ett litet barn,
då skulle jag gå ut och leka,
bygga mig en liten kvarn
och ro i min lilla eka.

Mången vän, som här jag vann,
under vita lakan blundar,
och nu är jag en gammal man,
som sitter vid brasan och grundar.

Gåta, saga, jordedag,
ditt djup kan ingen loda.
Ännu samma barn är jag
och människorna goda.

-Verner Von Heidenstam

हज़ार साल में: वर्नर वोन हेइदेन्स्तम

वर्नर वोन हेइदेन्स्तम की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

सुदूर अंतरिक्ष में एक कम्पन, एक स्मृति
उद्यान की, जो चमक उठी ऊँचे पेड़ों के बीच से.
मेरा नाम क्या? मैं कौन? मैं क्यूँ रोया?
सब भूल गया हूँ मैं, और एक तूफ़ानी संगीत की तरह
सबकुछ भाग रहा है दूर संसार से, चक्रवत.

Om tusen år


En dallring i en fjärran rymd, ett minne
av gården, som sken fram bland höga träd.
Vad hette jag? Vem var jag? Varför grät jag?
Förgätit har jag allt, och som en stormsång
allt brusar bort bland världarna, som rulla.

-Verner Von Heidenstam

Sunday, February 19, 2012

कल: हेनरी पर्लैंड

हेनरी पर्लैंड की एक और कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

कल
जब मैं घर गया
अँधेरी सड़क से रात में,
चमका आसमान से
शब्द
जिसे मैंने बहुत पहले ही जला दिया था.
---------
क्या अब मुझे आसमान भी जला देना चाहिए?


I går

I går
då jag gick hem
längs en nattmörk väg,
lyste från himlen
ord
som jag bränt för länge sedan.
---------
Skall jag nu bränna även himlen?

-Henry Parland

सत्य सबसे बुरा है: हेनरी पर्लैंड

हेनरी पर्लैंड की एक और कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

सत्य सबसे बुरा है सभी अर्थों में
वह
न बदसूरत है न सुन्दर ही
न सफ़ेद न काला ही
बल्कि वह है साधारण
और स्लेटी
जैसे जीवन
ठहरे हुए पानी में.

Sanningen är det värsta av allt


Sanningen är det värsta av allt
den är varken
ful eller vacker
vit eller svart
utan alldaglig
och grå
som livet
i ett stillastående vatten.

-Henry Parland

ईश्वर की पहली कृति: हेनरी पर्लैंड

हेनरी पर्लैंड की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

ईश्वर की पहली कृति
शून्य है.
आसमान ने धारण कर रखा है उसे,
सितारे भी वही हो जाने वाले हैं.
वह स्वयं भी वहीँ स्थित है.

उसकी अंतिम कृति
लौ है,
जो सब चीजों में छलती है.
क़यामत वाले दिन
इसकी चमक
जीवन को भस्म कर डालती है,
जो एक भड़कदार नक़ाब की तरह
छिपा लेता है
ईश्वर की पहली कृति को.


Guds första verk

Guds första verk
är Intet.
Himlen rymmer det,
stjärnorna skall bli det.
Han själv har varit det.

Hans sista verk
är Lågan,
som lurar i alla ting.
På domedagen
skall dess glöd
sluka livet,
som likt en brokig mask
döljer
Guds förstlingsverk.

-Henry Parland

Saturday, February 18, 2012

पेड़: सोल्वेग वोन स्कुल्त्ज़

सोल्वेग वोन स्कुल्त्ज़ की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

शायद यह फ़र्क था: वह एक पेड़ था.
वह सबसे बड़ा हो लिया: लिया उसने लम्बा समय विकसित होने के लिए,
अपनी पत्तियों को सूरज की आदत डालने के लिए, उन्हें नीचे झुकाने के लिए
रक्षार्थ अपने विश्वसनीय पांवों पर घास उगाने के लिए.
उसने समय लिया पत्थरों के चारों ओर अपनी जड़ें मोड़ने में
सोच में डूबे हुए, धीमी गति से राह तलाशने में,
उसे समय लगा कठोर होने में, समय लगा स्वयं को व्यापक करने में
जबकि दूरस्थ ग्रीष्म के कितने ही मौसम उसके तने में प्रतीक्षारत रहे.

यह पेड़ कैसे समझ पायेगा एक पौधे को?
उस पौधे को जिसका तीव्रता से बीत गया ग्रीष्म एकल ही रहा हो ?


Trädet


Kanske var det skillnaden: han var ett träd.
Han ägde det största: han ägde tid att växa,
att vanda sina blad mot solen, att vända dem ner
skyddande gräset vid sina trofasta fötter.
Han ägde tid att kröka sin rot runt stenen
grubblande, sökande sin långsamma väg,
tid att hårdna, tid att bredda sin krona
medan fjärran somrar bidade i hans bark.

Hur skulle detta träd förstå en ört?
En ört vars snabba sommar förblev en enda?

-Solveig Von Schoultz

Saturday, February 11, 2012

चाहतें: बेन्ग्त अन्देर्बेरी

बेन्ग्त अन्देर्बेरी की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक )

जून के महीने में होना चाहता हूँ
हल्के भूरे रंग के पंखों वाला भारव्दाज़ पक्षी,
देवदार वृक्ष अन्धकार के आगमन पर,
त्याग देना चाहता हूँ अपनी गति, बन जाना चाहता हूँ छछूंदर
और दुनिया के अंधकारपूर्ण समय में
आराम करना चाहता हूँ ,
जंगली पक्षियों के झुंड की तरह, जीवन के बाहर
धरती के तल में अपने सुनहरे रेतीले प्रवास पर.

Önskning

Önskar att i juni vara
lärkan med de ljusgrå vingar,
lärken, som när mörkret kommer,
fäller sina fjärdrar, blir till mullvad,
och i världens dunkla tid
vilar som ett nystan utav liv
i sitt gyllne sandbo ner i jorden.

-Bengt Anderberg

हाँ कृपया: सोन्या औकेसन

सोन्या औकेसन की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

एक गर्मजोश हाथ.
एक गर्म घोंसला.
एक गर्म जैकेट
पहनने के लिए बर्फीले विचारों पर.
एक गर्मजोश शरीर
पहनने के लिए शरीर पर.
एक गर्मजोश आत्मा
पहनने के लिए आत्मा पर.
एक गर्मजोशी से परिपूर्ण जीवन
पहनने के लिए बर्फीले जीवन पर.


Ja tack

En varm hand.
Ett varmt bo.
En varm kofta
att trä på de isande tankarna.
En varm kropp
att trä på kroppen.
En varm själ
att trä på själen.
Ett varmt liv
att trä på det isande livet.

-Sonja Åkesson

तुम दुनिया फिर से नहीं बना सकते: स्तिग डगेर्मन

स्तिग डगेर्मन की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

तुम दुनिया फिर से नहीं बना सकते.
अपनी आत्मा में उठने वाले तूफ़ान को शांत करो!
केवल एक काम तुम कर सकते हो:
अपना हाथ बढ़ा सकते हो एक टूटे हुए इंसान की मदद के लिए.

लेकिन यह, मेरे दोस्त, पर्याप्त से भी इतना अधिक है
कि तारे स्वयं मुस्कुराते हैं.
भूख से व्याकुल मनुष्यों में से एक की भूख का समाधान
अर्थात एक भाई हमने प्राप्त कर लिया.


Jorden kan du inte göra om

Jorden kan du inte göra om.
Stilla din häftiga själ!
Endast en sak kan du göra:
en annan människa väl.

Men detta är redan så mycket
att själva stjärnorna ler.
En hungrande Människa mindre
betyder en broder mer.

-Stig Dagerman

लोगों की बैठक: ह्यालमर युल्बेरी

ह्यालमर युल्बेरी  की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

यदि निर्जन वन में
चिंता आप पर हावी हो जाए,
एक संक्षिप्त मुठभेड़
राहत के लिए पर्याप्त हो सकती है.

सड़क का पता दें उसे,
फिर शांतिपूर्वक हो जाएँ अलग :
ऐसी ही होती थी अजनबियों की बैठक
प्राचीन रिवाज़ के अनुसार.

एक दो शब्द के आदान प्रदान से
आगे की राह आसान हो जाती थी.
लोगों की सभी वार्ता
इस तरह ही होनी चाहिए.


Människors möte
Om i ödslig skog
ångest dig betog,
kunde ett flyktigt möte
vara befrielse nog.

Giva om vägen besked,
därpå skiljas i fred:
sådant var främlingars möte
enligt uråldrig sed.

Byta ett ord eller två
gjorde det lätt att gå.
Alla människors möte
borde vara så.

-Hjalmer Gullberg

हम लोग: वर्नर वोन हेइदेन्स्तम

वर्नर वोन हेइदेन्स्तम की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

हम, जो कुछ संक्षिप्त क्षणों के लिए मिलते हैं,
एक ही मिटटी और एक ही चमत्कारिक तत्व की संतान,
तूफानों से घिरे हुए अपने जीवन के भूडमरूमध्य* पर!
क्या हम अनभीष्ट और प्रेम की ऊष्मा से हीन जाना चाहेंगे?
एक ही अकेलापन हम सभी का इंतज़ार कर रहा है,
एक ही उदास फुसफुसाहट के साथ कब्र की घास पर.

*
भूडमरूमध्य: भूमि की एक पतली पट्टी, जो दो बड़ी जलराशियों (अधिकांशतः सागर) को अलग करती है दो बड़े भूभागों को जोड़ती है।

Vi människor


Vi, som mötas några korta stunder,
barn av sammajord och samma under,
på vår levnads stormomflutna näs!
Skulle kärlekslöst vi gå och kalla?
Samma ensamhet oss väntar alla,
samma sorgsna sus på gravens gräs.

-Verner Von Heidenstam


Saturday, February 4, 2012

वापसी: बिर्गिता रुदेस्कोग

बिर्गिता रुदेस्कोग की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

लक्ष्य तक पहुँचने के लिए
अक्सर मुझे यात्रा करनी चाहिए
पीछे प्रारंभिक बिंदु तक
और हर बार
अंततः आगे पहुंचकर
हमेशा वापस सोचना चाहिए


Tur och Retur


för att nå målet
måste jag ofta resa
båkat till startpunkten
och varje gång
äntligen framme
alltid tänka tillbaka

-Birgita Rudeskog

अप्रैल में छंद: नील्स फर्लिन

नील्स फर्लिन की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

प्रेम के स्वर्ग की राह
पुरानी है लेकिन सदा नयी है:
दो हाथ मिल सकते हैं - आंशिक रूप से
एक छतरी के नीचे.
दो हाथ मिल सकते हैं ख़ुशी में,
दो हाथ मिल सकते हैं गम में.
और दो हाथ मिल सकते हैं लाभ के लिए
वैश्विक बाज़ार के चौराहे पर.


Strof i april

Vägen till kärlekens paradis
är gammal men evigt ny:
Två händar kan mötas - händelvis,
inunder ett paraply.
Två händer kan mötas i glädje,
två händer kan mötas i sorg.
Och två händer kan mötas för vinnings skull
på världens marknadstorg.

-Nils Ferlin

छोटी सी सोमवारीय सांत्वना: स्तिग डगेर्मन

स्तिग डगेर्मन की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

एक
पूर्ण सेकेण्ड जीवन का
कई कशीदेकारी से मुक्त है.
एक बेनाम पंछी साबित करता है खुद को
अपने माथे के ठोसपन से.
एक सोच विस्फुटित होती है
आतिशबाजी प्रदर्शन के रूप में:
हमारा वातावरण शायद
निराश नहीं है - केवल हम हैं.


Liten måndagströst

En hel sekund i livet
är mången broder fri.
En nämnlös fågel styrker
hans panna tätt förbi.
En tanke exploderar
som ett fyrverkeri:
Vårt läge är kanhända
inte höpplost - bara vi.

-Stig Dagerman

पैम्फलेट: क्रिस्तिआन कुप्चिक

क्रिस्तिआन कुप्चिक की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

बंज़र ज़मीन पर
अकेले अकेले तैरती
भूरे रंग के कागज़ की एक नाव

पर्यवेक्षक सो रहा है
और गूँज रही है एक ध्वनि:
"अगर मैं नहीं जलूँगा
अगर तुम नहीं जलोगे
अगर वो नहीं जलेगा
तो फिर कौन
लाएगा प्रकाश इस स्याह अँधेरे में?"


pamflett

genom det öde landet
ensam flyter ensam
en båt i brunt papper

besättningsmannen sover
och nynnar:
"om inte jag brinner
om inte du brinner
om inte han brinner
vem ska nånsin
bringa ljus i mörkret?"

-Christian Kupchik

हृदय: बो बर्यमन

बो बर्यमन की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

हृदय को सपनों के साथ बड़ा किया जाना चाहिए,
अन्यथा हृदय गरीब है.
जीवन, देता है हमें धाराओं सी बारिश.
जीवन, देता है हमें सूर्य और उष्णता.
ताकि दे सके आखिर में कुल्हाड़ी,
और सबके प्रति आभार के साथ
हम बढ़ते हैं फसल की कटाई वाले समय की ओर,
उदासी और ठिठुरन लिए हुए.


Hjärtat

Hjärtat skall gro av drömmar,
annars är hjärtat armt.
Liv, ge oss regn som strömmar.
Liv, ge oss sol och varmt.
Så blir det ax omsider,
och med ett tack till allt
gå vi mot skördetider,
vemod och vinterkallt.

-Bo Bergman

एक न एक दिन हम सब मर जायेंगे: बरब्रो लिन्द्ग्रें

बरब्रो लिन्द्ग्रें की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

एक न एक दिन हम सब मर जायेंगे
तुम और मैं
सभी कमज़ोर इंसान मर जायेंगे
और सभी जानवर
और सभी पेड़ मर जायेंगे
और धरा पर खिले फूल भी
लेकिन
एक ही बार में नहीं
बल्कि कभी कभार अलग अलग समय पर
ताकि उसपर शायद ही ध्यान जाए!


Någon gång ska vi dö

Någon gång ska vi dö
du och jag
Alla människör ska dö
och alla djur
och alla träd ska dö
och blommorna på marken
men
inte allihop på samma gång
utan då och då
så att det knappast märks

-Barbro Lindgren