Monday, August 19, 2013

छोटी सी बात: कारिन बुवेए

कारिन बुवेए की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

क्या आप एक और कदम नहीं चल सकते,
उठा नहीं सकते क्या अपना मस्तक एकबार,
कराहते हों जब आप थके हारे निराशाजनक धुंधलेपन में --
तब हो संतुष्ट, आभार मानिए सामान्य सी, छोटी चीज़ों का,
जो है धीरज देने वालीं व बाल-सुलभ.
आपके पास जेब में है एक सेब,
घर पर परियों की कहानियों की है एक क़िताब --
छोटी छोटी तुच्छ चीज़ें, जो रहीं तिरस्कृत
जीवन के उन्मुक्त, जीवंत समय में,
उन्होंने ही थामे रखा मृत्यु की सी नीरवता के अन्धकार में.

Små ting

Orkar du inte ett steg mer,
inte lyfta ditt huvud,
dignar du trött under hopplös gråhet --
tacka då nöjd de vänliga, små tingen,
tröstande, barnsliga.
Du har ett äpple i fickan,
en bok med sagor där hemma --
små, små ting, föraktade
i den tid, som strålade levande,
men milda fästen under de döda timmarna.

-Karin Boye

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