Friday, June 15, 2012

पीड़ा में होना कठिन है: गुन्नर इकेलोफ़

गुन्नर इकेलोफ़ की एक और कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)

पीड़ा में होना कठिन है
पीड़ा में होना प्रेम के बिना कठिन है
प्रेम करना संभव नहीं है बिना पीड़ा में पड़े हुए
प्रेम करना कठिन है

Att lida är svårt

Att lida är svårt
Att lida utan att älska är svårt
Att älska utan att lida är icke möjligt
Att älska är svårt

-Gunnar Ekelöf

3 comments:

  1. छोटी सी कविता में बड़ी बात.
    इन सुन्दर रचनाओं से परिचय कराने के लिए, अनुपमा एक बार फिर आप का धन्यवाद.

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  2. मोहलत मेरे कुछ श्वास की ...
    इस कुंड में तू झोंक दे ...

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  3. सत्य ... और सुन्दर ....
    सचमुच ...
    प्रेम करना कठिन है ....
    परन्तु अन्य कोई ना मार्ग है ...ना ही गंतव्य ...
    फिर भी ...क्या ... अपना होना ...या ना होना ...प्रेम ही नहीं है ...

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