Wednesday, July 18, 2012

प्रमाण: ब्रुनो के. ओइयर

ब्रुनो के. ओइयर की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)


आँतों में खाद्य
वह दैनिक जुगाली
मौसम, समाज एवं अन्य बीमारियाँ के विषय में
सबने पैठ जमा ली है हमारे जीन में
और रोक रखा है सत्य को सामने आने से
जैसे कि इंसान ने अंततः आधी सदी के बाद
ढूंढ़ निकाला हो उस लापता विमान को
जो स्थिर खड़ा था गगन में
बारिश बर्फ और ओलों से जंग खाया हुआ
पंखों के आसपास उगे हुए थे जाले
यात्रा के सामान और कपड़े बिखरे पड़े थे बादलों की तरह

Bevis

inälvsmaten
det dagliga tuggandet
om vädret samhället och andra sjukdomar
har satt seg i våra gener
och hindrat sanningen att komma fram
som att man äntligen efter ett halvt sekel
hittat det försvunna flygplanet
det stod stilla i himlen
rostigt av regn snö och hagel
kring vingarna växte spindelväv
resväskor och kläder låg utspridda som moln

-Bruno K. Öijer

1 comment:

  1. कल 20/07/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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