Friday, July 20, 2012

जो चल रहा है अभी: स्तिग योहानसन

स्तिग योहानसन की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक) 


पंछी गाते हैं और उन्हें प्रत्युत्तर मिलता है
जलाशय के दूसरे पार से.
कभी कभी मुझे लगता है कि यह बात सुन्दर है.

और इसी बीच जब मैं खड़ा होता हूँ और सुनता हूँ
और देखता हूँ सनौबर के पेड़ों द्वारा वन बनने की खातिर
                                                           किये गए यत्न को
तब स्थानांतरित हो जाता हूँ मैं अतीत के करीब.

घट जाता है कालापन
आकाश नहीं रह जाता है पहले जैसा.
फिर भी यह एक बिलकुल सामान्य सा दिन है
और न ही कोई ख़ास समय वर्ष का.

Det som för närvarande pågår

Fåglar sjunger och får svar
från andra sidan bäcken.
Ibland tycker jag det är vackert.

Och medan jag står och lyssnar
och ser björkarnas strävan
                            efter att bli skog
flyttas jag närmare det förflutna.

Svärtan avtar
Himlen är inte längre densamma.
Ändå är det en helt vanlig dag
och ingen särskild årstid.

-Stig Johansson

7 comments:

  1. कल 22/07/2012 को आपकी यह बेहतरीन पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  2. सुन्दर कविता

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  3. प्रकृति में हर क्षण खास है ..

    सुंदर प्रस्‍तुति !!

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  4. घट जाता है कालापन
    आकाश नहीं रह जाता है पहले जैसा.
    फिर भी यह एक बिलकुल सामान्य सा दिन है
    और न ही कोई ख़ास समय वर्ष का.
    .. एक बेहतरीन कविता पढ़वाने के ..शुक्रिया और बधाई

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  5. सुन्दर ! बेहद सुन्दर ! आपको धन्यवाद !!

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  6. हर दिन ही साधारण है वक्त की कीताब में..रंग, आवाजें ,हंसी ,रोना पल पल समय का बदलता रूप है जिसमे उत्सव भी शामिल है और रुदन भी ..हर दिन साधारण है .शुक्रिया

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