Thursday, July 19, 2012

स्वतंत्र: योरान ग्रेइदर

योरान ग्रेइदर की एक कविता
(अनुवाद: अनुपमा पाठक)


उन्हें लगता है कि मैं समकालीन हूँ
कि मेरी तलाश है "राजनीतिक".

बेशक ऐसा नहीं है:
यह दर्द है कई हज़ार वर्ष पुराना.
और कविता है मात्र पगडंडियों का जालक्रम
सौंपी गयी उन्हें जो हैं उसके प्रति उदासीन.

तो आज मुझे क्या लिखना चाहिए?
स्वतंत्रता करती है अभिभूत मुझे हमेशा.


Fri

De tror nog att jag är samtida
att jag letar efter det "politiska".

Så är det naturligtvis inte:
Den här smärtan är flera tusen år gammal.
Och poesin är bara ett nät av stigar
kastat över det likgiltiga.

Så vad ska jag skriva idag?
Friheten överväldigar mig alltid.

-Göran Greider

3 comments:

  1. बहुत अच्छी कविता. आभार!!

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  2. मेरी तलाश है...
    मेरी प्यास है...
    मेरा घर है...
    स्वतंत्रता....!

    घर पहुँचता हूँ...
    नेह पाता हूँ...
    स्नेह बांटता हूँ...
    पाता हूँ सहजीविता...!!

    उसके आगे...

    प्रेम और मौन के सार्थक क्षणों में...
    सबमे पाता हूँ...
    खुद को...
    फिर खो जाता हूँ मै...
    रह जाता है....
    आत्म-रस....!!!

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